Welcome to the world of crafts...welcome to Madhubani:Home of Papier-Mache

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Saturday, July 11, 2009


product name : ganesh ji
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call : 919431654082

nativity/jesus christ ka janm


product name : nativity/jesus christ ka janm
set : 10 piece set
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the bride and the groom /kaniya-bar

product name : the bride and the groom /kaniya-bar
height : 15"
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call : 919431654082

pen stand & plate

product name : pen stand & plate
to buy contact : kaushalkamini.1779@rediffmail.com
call : 919431654082

papier mache jewellery box

product name : jewellery box
size : 5"x4"x3"
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call : 919431654082

Sunday, May 24, 2009

कामिनी कौशल : पेपरमेसी-कला की नई पहचान

श्रीमती कामिनी कौशल का जन्म मधुबनी जिलान्तर्गत बिसौल गाँव में हुआ। इस गाँव की अपनी अलग ही ऐतिहासिक गाथा है और धार्मिक महत्व भी। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम अपने गुरू विश्वामित्र के साथ अयोध्या से जनकपुर सीता के स्वयंवर में भाग लेने जाते समय इसी गाँव में रात्रि-विश्राम के लिए ठहरे थे। इस प्रकार के धार्मिक एवम सांस्कृतिक माहौल में पलने-बढने के कारण इनका रुझान पारंपरिक कला के प्रति सहज ही हो गया। घर पर विभिन्न कला, यथा मधुबनी-चित्रकला, पेपरमेसी आदि से ये प्रभावित थीं।

विवाह पश्चात भी इन्हें इसी प्रकार का माहौल मिला। इनकी सास स्वर्गीय तारिणी देवी भी पेपरमेसी एवम मधुबनी-चित्रकला की शिल्पकारी किया करती थीं। इससे इन्हें पेपरमेसी शिल्प को आगे बढाने की इच्छा हुई। चूंकि इस शिल्प की ना केवल पारम्परिक महत्ता है अपितु यह पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में भी अनूठी पहल है। इस शिल्प में बेकार पडे कागज का प्रयोग होता है, जिससे इसके कारण फैलने वाली गन्दगी भी साफ होती है और शिल्प निर्माण से सौन्दर्य वृद्धि होती है। इन्हें इस प्रयास में अपने पति एवम परिवार का पूरा सहयोग मिला। इससे इनका उत्साहवर्धण हुआ, साथ ही इन्होंने पेपरमेसी को दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं में परिवर्तित किया, जिससे इनके द्वारा निर्मित शिल्प की माँग राष्ट्रीय एवम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खूब हो रही है।

साथ ही कार्यालय विकास आयुक्त(हस्त-शिल्प) से भी काफी सहयोग मिला एवम कार्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न प्रदर्शनी में भाग लेने का अवसर दिया गया। इसी क्रम में वर्ष २००३ में सूरज-कुण्ड शिल्प-मेला में भाग लेने पर इन्हें "कला-निधि" सम्मान से सम्मानित किया गया। इन्होंने दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ, देहरादून, बंगलौर, कलकत्ता, पुणे आदि शहरों में आयोजित विविध प्रदर्शनियों में भाग लिया, जिनमें इनकी कला को बहुत सराहा गया।इस शिल्प के विकास की एक कडी इस कला का प्रशिक्षण भी है, जिसके लिए ये विभिन्न शहरें में कार्यशालाएँ आयोजित करती हैं। पेपरमेसी शिल्प में इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें वर्ष २००७ का "विजय देशमुख सम्मान"(सर्वश्रेष्ठ मिला कारीगर-२००७) प्रदान किया गया।
श्रीमति कामिनी कौशल इस कला को नई ऊँचाइयोम तक ले जाने को कृत-समकल्पित हैं।